कैसे इस्तेमाल करें
- इनवॉइस की ड्यू डेट डालें।
- अगर खरीदार ने बाद में लिखित में बकाया माना या आंशिक भुगतान किया, तो उसकी आखिरी तारीख डालें (वैकल्पिक)।
- नतीजे में मूल लिमिटेशन तारीख, स्वीकृति का असर, केस दर्ज करने की आखिरी तारीख और बचे हुए दिन दिखेंगे।
नियम आसान भाषा में
माल या सेवा की कीमत के लिए केस ड्यू डेट से तीन साल के अंदर दर्ज करना होता है (Limitation Act, 1963)। अगर तीन साल पूरे होने से पहले खरीदार ने हस्ताक्षर करके लिखित में कर्ज़ माना (धारा 18), या लिखित सबूत के साथ आंशिक भुगतान किया (धारा 19), तो तीन साल उसी तारीख से दोबारा शुरू होते हैं। कैलकुलेटर यह भी जांचता है कि स्वीकृति वैध है या नहीं: अगर वह अवधि खत्म होने के बाद या ड्यू डेट से पहले की है, तो उसका असर नहीं माना जाता।
क्या स्वीकृति माना जाता है: खरीदार का हस्ताक्षर वाला पत्र या ईमेल जिसमें कर्ज़ या बैलेंस माना गया हो; खरीदार द्वारा साइन किया गया बैलेंस या लेजर कन्फ़र्मेशन; देनदारी बताता हुआ लिखित वादा। काफ़ी नहीं है: आपके अपने रिमाइंडर, या बिना हस्ताक्षर का स्टेटमेंट।
ध्यान रखें, लीगल नोटिस भेजने से घड़ी नहीं रुकती; केस दर्ज करने से रुकती है। MSME Samadhaan के रेफ़रेंस पर भी Council आम तौर पर Limitation Act लागू करती हैं, इसलिए वहां भी तीन साल को ही सीमा मानें और जल्दी आवेदन करें।
आखिरी तारीख करीब हो, तो उससे पहले केस दर्ज करें या खरीदार से हस्ताक्षर वाली स्वीकृति लें। FundRaksha फ्री कंसल्टेशन में लिमिटेशन जांचता है और समय पर Samadhaan रेफ़रेंस या केस दर्ज करता है; फ़ीस सिर्फ़ वसूली पर 30%।
उदाहरण
इनवॉइस की ड्यू डेट 1 अप्रैल 2023 थी। सामान्य रूप से केस 1 अप्रैल 2026 तक दर्ज करना था। लेकिन खरीदार ने 10 जनवरी 2025 को लेजर कन्फ़र्मेशन पर साइन किया, जो तीन साल पूरे होने से पहले है, इसलिए नई आखिरी तारीख 10 जनवरी 2028 हो जाती है।
English में पढ़ें: Limitation period calculator for recovering an unpaid invoice