फ्री कैलकुलेटर

लेट पेमेंट ब्याज कैलकुलेटर (नॉन-MSME)

जो सप्लायर माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ नहीं हैं, उनके लिए देर से भुगतान पर ब्याज कॉन्ट्रैक्ट से तय होता है, या कोर्ट CPC की धारा 34 और Interest Act, 1978 के तहत देता है, आम तौर पर कमर्शियल दर पर साधारण ब्याज। रकम, ड्यू डेट और दर डालें।

Days overdue
279
Interest
₹68,795
Principal + interest
₹5,68,795

Simple interest: amount × rate × days ÷ 365. Use the rate in your contract or invoice terms; otherwise a reasonable commercial rate the court or arbitrator may award. For MSME statutory interest (compounded, 3 × bank rate) use the MSME calculator.

कैसे इस्तेमाल करें

  1. इनवॉइस की रकम (₹) डालें।
  2. इनवॉइस की ड्यू डेट डालें।
  3. ब्याज दर (% सालाना, साधारण) डालें: कॉन्ट्रैक्ट या इनवॉइस में लिखी दर, या उचित कमर्शियल दर।
  4. किस तारीख तक ब्याज चाहिए, चुनें। नतीजे में ओवरड्यू दिन, ब्याज और कुल रकम दिखेगी।

नियम आसान भाषा में

अगर आपके कॉन्ट्रैक्ट या इनवॉइस में देर से भुगतान पर ब्याज दर लिखी है, तो ड्यू डेट से वही दर मांगें। अगर नहीं लिखी, तो कोर्ट और आर्बिट्रेटर उचित दर देते हैं (अक्सर 9% से 18% सालाना, साधारण), ड्यू डेट से या नोटिस की तारीख से। MSME सप्लायर इसकी जगह बैंक रेट का 3 गुना, चक्रवृद्धि मांगते हैं; उसके लिए MSME ब्याज कैलकुलेटर देखें।

ब्याज को वसूली योग्य बनाने के लिए दर अपने कोटेशन, PO स्वीकृति और इनवॉइस पर लिखें, जैसे "ड्यू डेट के बाद बकाया रकम पर 18% सालाना ब्याज"। जो खरीदार बिना आपत्ति के माल और इनवॉइस स्वीकार कर लेता है, वह आम तौर पर उसकी शर्तों से बंधा होता है। हर रिमाइंडर और लीगल नोटिस में आज तक का गणना किया हुआ ब्याज लिखें।

कॉन्ट्रैक्ट में लिखा न हो, तो MSMED Act के बिना चक्रवृद्धि ब्याज नहीं मिलता; कोर्ट साधारण ब्याज देते हैं। केस से पहले की अवधि के लिए 9% से 12% के आसपास की कमर्शियल दरें आम हैं, कभी-कभी ज़्यादा, जहां कॉन्ट्रैक्ट या ट्रेड प्रैक्टिस इसका समर्थन करे। आर्बिट्रेटर अक्सर कॉन्ट्रैक्ट वाली दर देते हैं।

ब्याज मूल रकम के साथ नोटिस, समरी सूट या आर्बिट्रेशन में मांगा जाता है। FundRaksha के वकील इसे सामान्य रूप से गणना करके मांगते हैं; फ्री कंसल्टेशन में पता चलता है कि आपके दस्तावेज़ों पर कितना मिलना यथार्थवादी है। फ़ीस सिर्फ़ वसूली पर 30%।

उदाहरण

₹4,00,000 का इनवॉइस 365 दिन से ओवरड्यू है और इनवॉइस पर 18% सालाना ब्याज लिखा है। साधारण ब्याज = ₹4,00,000 × 18% × 365 ÷ 365 = ₹72,000, यानी कुल दावा ₹4,72,000। दर न लिखी हो और कोर्ट 9% दे, तो ब्याज ₹36,000 होगा।

English में पढ़ें: Late payment interest calculator (non-MSME)

FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिर्फ़ तब, जब कॉन्ट्रैक्ट में ऐसा लिखा हो। वरना कोर्ट साधारण ब्याज देते हैं।

यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। बड़े लेन-देन से पहले ताज़ा नोटिफिकेशन ज़रूर देखें।