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ई-इनवॉइस लिमिट चेकर: क्या आपके लिए ई-इनवॉइसिंग ज़रूरी है?

2017-18 से हर वित्त वर्ष का अपना एग्रीगेट टर्नओवर और बिज़नेस का प्रकार डालें। चेकर चरणों में लागू हुई ई-इनवॉइसिंग सीमाओं के हिसाब से बताता है कि ई-इनवॉइसिंग किस तारीख से लागू है और 30 दिन की रिपोर्टिंग सीमा आप पर लागू होती है या नहीं।

E-invoicing
Mandatory now
Highest turnover entered
₹5.4 crore
Year that triggered it
2025-26
30-day reporting limit
Does not apply (AATO below ₹10 crore)
WhyTurnover in 2025-26 was ₹5.4 crore, above the threshold in force at the time, so B2B invoices, export invoices and B2B credit and debit notes need an IRN from the Invoice Registration Portal from 1 April 2026. Once you cross the limit in any year, the obligation stays even if turnover falls later.
What is coveredSupplies to registered businesses (B2B), exports and deemed exports, and credit and debit notes on them. B2C invoices to consumers are not e-invoiced (a dynamic QR code applies to B2C above ₹500 crore turnover).
30-day ruleTaxpayers with annual aggregate turnover of ₹10 crore or more cannot report an invoice, credit note or debit note to the IRP more than 30 days after its date. Without an IRN the document is not a valid invoice and the buyer cannot take credit.

Threshold: aggregate turnover above ₹5 crore in any financial year from 2017-18 onwards (Notification 10/2023-Central Tax, dated 10 May 2023, effective 1 August 2023). Aggregate turnover is computed on the PAN, across all GSTINs in India, including exempt and export supplies. Exemptions: Notification 13/2020-Central Tax as amended. 30-day rule: GSTN advisory dated 5 November 2024, applied from 1 April 2025 to taxpayers with AATO of ₹10 crore and above. Position as of 21 October 2026.

कैसे इस्तेमाल करें

  1. 2017-18 से हर वित्त वर्ष का एग्रीगेट टर्नओवर डालें (PAN पर, सभी GSTIN मिलाकर)।
  2. 30 दिन वाले नियम के लिए पिछले वित्त वर्ष का सालाना एग्रीगेट टर्नओवर (AATO) डालें।
  3. बिज़नेस का प्रकार चुनें, ताकि छूट वाली श्रेणी हो तो पता चले।
  4. नतीजे में ई-इनवॉइसिंग की स्थिति, सबसे ज़्यादा टर्नओवर, किस साल से लागू हुआ और 30 दिन की सीमा दिखेगी।

नियम आसान भाषा में

जिस GST रजिस्टर्ड बिज़नेस का एग्रीगेट टर्नओवर 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर गया, उसके लिए ई-इनवॉइसिंग ज़रूरी है (Notification 10/2023-Central Tax, 1 अगस्त 2023 से)। इसमें B2B इनवॉइस, एक्सपोर्ट और B2B क्रेडिट व डेबिट नोट आते हैं। SEZ यूनिट, बैंक, बीमा कंपनियां, NBFC, गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी, पैसेंजर ट्रांसपोर्ट, मल्टीप्लेक्स सिनेमा और सरकारी विभाग छूट में हैं। SEZ डेवलपर छूट में नहीं है।

सीमा चरणों में घटी: ₹500 करोड़ (1 अक्टूबर 2020), ₹100 करोड़ (1 जनवरी 2021), ₹50 करोड़ (1 अप्रैल 2021), ₹20 करोड़ (1 अप्रैल 2022), ₹10 करोड़ (1 अक्टूबर 2022) और ₹5 करोड़ (1 अगस्त 2023)। 21 अक्टूबर 2026 तक ₹5 करोड़ ही लागू सीमा है। अगर आपका टर्नओवर पहली बार FY 2025-26 में ₹5 करोड़ पार हुआ, तो ई-इनवॉइसिंग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होती है। एक बार लागू होने के बाद टर्नओवर बाद में घट जाए, तब भी यह जारी रहती है।

टर्नओवर PAN पर, भारत के सभी GSTIN मिलाकर गिना जाता है, और इसमें छूट वाली और एक्सपोर्ट सप्लाई भी शामिल हैं, GST नहीं। 1 अप्रैल 2025 से जिनका सालाना एग्रीगेट टर्नओवर ₹10 करोड़ या ज़्यादा है, वे इनवॉइस, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट को दस्तावेज़ की तारीख से 30 दिन बाद IRP पर रिपोर्ट नहीं कर सकते (GSTN एडवाइज़री, 5 नवंबर 2024); IRP देर वाला दस्तावेज़ सीधे रिजेक्ट कर देता है। यह सीमा ई-वे बिल पर नहीं, सिर्फ़ दस्तावेज़ों पर है।

जिस इनवॉइस पर IRN होना चाहिए था और नहीं है, वह खरीदार के क्रेडिट के लिए वैध टैक्स इनवॉइस नहीं है। ई-इनवॉइस IRP से जुड़े बिलिंग सॉफ़्टवेयर से या मुफ़्त IRP पोर्टल (einvoice1.gst.gov.in और दूसरे अधिकृत IRP) पर बनते हैं। FundRaksha Book ई-इनवॉइस नहीं बनाता। शुरू करने से पहले हर खरीदार का GSTIN जांचें, क्योंकि गलत या रद्द GSTIN पर IRN रिक्वेस्ट फ़ेल होती है।

उदाहरण

लुधियाना के एक मैन्युफ़ैक्चरर के एक ही PAN पर पंजाब और हरियाणा में दो GSTIN हैं। दोनों का मिलाकर टर्नओवर FY 2023-24 में ₹3.8 करोड़, FY 2024-25 में ₹4.6 करोड़ और FY 2025-26 में ₹5.4 करोड़ था। FY 2025-26 पहला साल है जब ₹5 करोड़ पार हुआ, इसलिए दोनों GSTIN पर 1 अप्रैल 2026 से ई-इनवॉइसिंग लागू है। AATO ₹5.4 करोड़ है, ₹10 करोड़ से कम, इसलिए 30 दिन की सीमा अभी लागू नहीं। FY 2026-27 में टर्नओवर ₹4.5 करोड़ रह जाए, तब भी ई-इनवॉइसिंग जारी रहेगी।

Sources

English में पढ़ें: E-invoice limit checker: is e-invoicing mandatory for you?

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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नहीं। ई-इनवॉइसिंग B2B सप्लाई, एक्सपोर्ट और डीम्ड एक्सपोर्ट पर है। अलग से, ₹500 करोड़ से ऊपर टर्नओवर वालों को B2C इनवॉइस पर डायनामिक QR कोड छापना होता है।

यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। बड़े लेन-देन से पहले ताज़ा नोटिफिकेशन ज़रूर देखें।