कैसे इस्तेमाल करें
- 2017-18 से हर वित्त वर्ष का एग्रीगेट टर्नओवर डालें (PAN पर, सभी GSTIN मिलाकर)।
- 30 दिन वाले नियम के लिए पिछले वित्त वर्ष का सालाना एग्रीगेट टर्नओवर (AATO) डालें।
- बिज़नेस का प्रकार चुनें, ताकि छूट वाली श्रेणी हो तो पता चले।
- नतीजे में ई-इनवॉइसिंग की स्थिति, सबसे ज़्यादा टर्नओवर, किस साल से लागू हुआ और 30 दिन की सीमा दिखेगी।
नियम आसान भाषा में
जिस GST रजिस्टर्ड बिज़नेस का एग्रीगेट टर्नओवर 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर गया, उसके लिए ई-इनवॉइसिंग ज़रूरी है (Notification 10/2023-Central Tax, 1 अगस्त 2023 से)। इसमें B2B इनवॉइस, एक्सपोर्ट और B2B क्रेडिट व डेबिट नोट आते हैं। SEZ यूनिट, बैंक, बीमा कंपनियां, NBFC, गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी, पैसेंजर ट्रांसपोर्ट, मल्टीप्लेक्स सिनेमा और सरकारी विभाग छूट में हैं। SEZ डेवलपर छूट में नहीं है।
सीमा चरणों में घटी: ₹500 करोड़ (1 अक्टूबर 2020), ₹100 करोड़ (1 जनवरी 2021), ₹50 करोड़ (1 अप्रैल 2021), ₹20 करोड़ (1 अप्रैल 2022), ₹10 करोड़ (1 अक्टूबर 2022) और ₹5 करोड़ (1 अगस्त 2023)। 21 अक्टूबर 2026 तक ₹5 करोड़ ही लागू सीमा है। अगर आपका टर्नओवर पहली बार FY 2025-26 में ₹5 करोड़ पार हुआ, तो ई-इनवॉइसिंग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होती है। एक बार लागू होने के बाद टर्नओवर बाद में घट जाए, तब भी यह जारी रहती है।
टर्नओवर PAN पर, भारत के सभी GSTIN मिलाकर गिना जाता है, और इसमें छूट वाली और एक्सपोर्ट सप्लाई भी शामिल हैं, GST नहीं। 1 अप्रैल 2025 से जिनका सालाना एग्रीगेट टर्नओवर ₹10 करोड़ या ज़्यादा है, वे इनवॉइस, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट को दस्तावेज़ की तारीख से 30 दिन बाद IRP पर रिपोर्ट नहीं कर सकते (GSTN एडवाइज़री, 5 नवंबर 2024); IRP देर वाला दस्तावेज़ सीधे रिजेक्ट कर देता है। यह सीमा ई-वे बिल पर नहीं, सिर्फ़ दस्तावेज़ों पर है।
जिस इनवॉइस पर IRN होना चाहिए था और नहीं है, वह खरीदार के क्रेडिट के लिए वैध टैक्स इनवॉइस नहीं है। ई-इनवॉइस IRP से जुड़े बिलिंग सॉफ़्टवेयर से या मुफ़्त IRP पोर्टल (einvoice1.gst.gov.in और दूसरे अधिकृत IRP) पर बनते हैं। FundRaksha Book ई-इनवॉइस नहीं बनाता। शुरू करने से पहले हर खरीदार का GSTIN जांचें, क्योंकि गलत या रद्द GSTIN पर IRN रिक्वेस्ट फ़ेल होती है।
उदाहरण
लुधियाना के एक मैन्युफ़ैक्चरर के एक ही PAN पर पंजाब और हरियाणा में दो GSTIN हैं। दोनों का मिलाकर टर्नओवर FY 2023-24 में ₹3.8 करोड़, FY 2024-25 में ₹4.6 करोड़ और FY 2025-26 में ₹5.4 करोड़ था। FY 2025-26 पहला साल है जब ₹5 करोड़ पार हुआ, इसलिए दोनों GSTIN पर 1 अप्रैल 2026 से ई-इनवॉइसिंग लागू है। AATO ₹5.4 करोड़ है, ₹10 करोड़ से कम, इसलिए 30 दिन की सीमा अभी लागू नहीं। FY 2026-27 में टर्नओवर ₹4.5 करोड़ रह जाए, तब भी ई-इनवॉइसिंग जारी रहेगी।
Sources
- cbic-gst.gov.in (Notification No. 10/2023-Central Tax, dated 10 May 2023, effective 1 Augu
- cbic-gst.gov.in (Notification No. 13/2020-Central Tax as amended: e-invoicing and exempt c
- einvoice1.gst.gov.in (GSTN advisory dated 5 November 2024: 30-day reporting limit for AATO
- einvoice6.gst.gov.in/content/revised-time-limit-for-e-invoice-reporting-for-businesses-wit
English में पढ़ें: E-invoice limit checker: is e-invoicing mandatory for you?